तू नागेश्वर तू ही महेश्वर

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तू नागेश्वर तू ही महेश्वर, तू ही जग का दाता है,

तू नागेश्वर तू ही महेश्वर, तू ही जग का दाता है,

भक्तों के घर जो कुछ भी दिखता, तेरे ही धाम से आता है,

तू नागेश्वर तू ही महेश्वर, तू ही जग का दाता है,

तू नागेश्वर तू ही महेश्वर, तू ही जग का दाता है।

तुम हो स्वामी हम सेवक है,

मन से तुम्हारे उपासक है,

हम है सवाली तुम महादानी,

करुणा तुम्हारी है कल्याणी,

तू गंगाधर तू ही आदिश्वर,

तू ही भाग्य विधाता है,

भक्तों के घर जो कुछ भी दिखता,

तेरे धाम से आता है,

तू नागेश्वर तू ही महेश्वर तू ही जग का दाता है॥

हार पहनते हो नागो नागों के,

लीला ही अद्भुत करते हो,

तुम ही तो भस्म रमैया हो,

नैया के दिव्य खेवैया खिवैया हो,

तू योगेश्वर तू ही भूतेश्वर,

तीनो तीनों ही लोक चलाता है,

भक्तों के घर जो कुछ भी दिखता,

तेरे धाम से आता है,

तू नागेश्वर तू ही महेश्वर तू ही जग का दाता है॥

प्रजापति सिद्ध सन्यासी,

तुम ही हो कैलाश के वाशी,

दोनों के ही तुम पालक हो,

दोनों के ही तुम पालक हो,

सृष्टि के ही संचालक हो,

सृष्टि के ही संचालक हो,

तू सर्वेश्वर अर्धनारीश्वर,

तू ही बनाता मिटाता है,

भक्तों के घर जो कुछ भी दिखता,

तेरे धाम से आता है,

तू नागेश्वर तू ही महेश्वर तू ही जग का दाता है॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।