माँ सिद्धिदात्री जी की आरती

पारंपरिक
माता दुर्गा आरती दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जय सिद्धिदात्री, ॐ जय सिद्धिदात्री,

सर्व सुखों की जननी, रिद्धि सिद्धिदात्री॥

ॐ जय सिद्धिदात्री......

अणिमा गरिमा लघिमा, सिद्धि तिहारे हाथ,

तू अविचल महामाई, त्रिलोकी की नाथ,

ॐ जय सिद्धिदात्री......

शुम्भ निशुम्भ विडारे, जग है प्रसिद्ध गाथा,

सहस्त्र भुजा तनु धरके, चक्र लियो हाथा,

ॐ जय सिद्धिदात्री......

तेरी दया बिन रिद्धि, सिद्धि ना हो पाती,

सुख समृद्धि देती, तेरी दया दाती,

ॐ जय सिद्धिदात्री......

दुःख दारिद्र विनाशनी, दोष सभी हरना,

दुर्गुणों को संघारके, पावन माँ करना,

ॐ जय सिद्धिदात्री......

नवदुर्गों में मैया, नवम तेरा स्थान,

नौवे नवरात्रे को, करें तेरा सब ध्यान,

ॐ जय सिद्धिदात्री......

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता,

भक्तन की दुःख हरता, सुख सम्पति करता,

ॐ जय सिद्धिदात्री......

अगर कपूर की ज्योति, आरती हम गायें,

छोड़ के तेरा द्वारा, और कहाँ जायें,

ॐ जय सिद्धिदात्री......

सिद्धिदात्री हे माता, सब दुर्गुण हरना,

अपना जान के मैया, हमपे कृपा करना,

ॐ जय सिद्धिदात्री......

जय सिद्धिदात्री, ॐ जय सिद्धिदात्री,

सर्व सुखों की जननी, रिद्धि सिद्धिदात्री॥

ॐ जय सिद्धिदात्री......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।