माँ महागौरी जी की आरती

पारंपरिक
महादेव आरती दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

महागौरी दया कीजे, जगजननी दया कीजे,

उमा रमा ब्रह्माणी, अपनी शरण लीजे॥

महागौरी दया कीजे......

गौर वर्ण अति सोहे, वृषभ की असवारी,

श्वेत वस्त्रों में मैया, लागे छवि प्यारी,

महागौरी दया कीजे......

सृष्टि रूप तुम्ही हो, शिव अंगी माता,

भक्त तुम्हारे अनगिन, नित प्रतिगुण गाता,

महागौरी दया कीजे......

दक्ष के घर जन्मी तुम, ले अवतार सती,

प्रगटी हिमाचल के घर, बन शिवा पार्वती,

महागौरी दया कीजे......

नवदुर्गों में मैया, आठवाँ तेरा स्वरूप,

शिव भी मोहित हो गये, देख के तेरा रूप,

महागौरी दया कीजे......

आठवें नवरात्रे को, जो व्रत तेरा करे,

पाता प्यार तुम्हारा, भव सिन्धु वो तरे,

महागौरी दया कीजे......

वेद पुराण में महिमा, तेरी माँ अपरम्पार,

हम अज्ञानी कैसे, पायें तुम्हारा पार,

महागौरी दया कीजे......

महागौरी महामाया, आरती तेरी गाते,

करुणामयी दया कीजे, निशदिन तुझे ध्याते,

महागौरी दया कीजे......

शिव शक्ति महागौरी, चरण शरण लीजे,

बालक जान के अपना, हमपे दया कीजे,

महागौरी दया कीजे......

महागौरी दया कीजे, जगजननी दया कीजे,

उमा रमा ब्रह्माणी, अपनी शरण लीजे॥

महागौरी दया कीजे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।