ओ माँ तू तो जाने व्यथा मन की

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ओ माँ तू तो जाने व्यथा मन की,

अँखियाँ जो छुप छुप रोई तुझसे छुपी ना कोई,

हरी तूने हर पीड़ा दुखियन की॥

ओ माँ...

पर्वत त्रिकूट पे चढ़के कन्या का रूप धरके, तुमने बसाया वैष्णोधाम.....-2

सुनली तूने सदा श्रीधर की देके उसे सहारा,

करवाके फिर भंडारा, भरी झोली तूने एक निर्धन की ।

ओ मां...

भैरव ने तुझसे माँगा मांस मदिरा प्याला, अहंकार तूने ही तोड़ा....-2

भैरो घाटी गिरा सर कट के मांगी क्षमा जो उसने,

करके दया फिर तुमने लाज रखली उसके असुवन की,

ओ माँ तू तो जाने व्यथा मन की,

अँखियाँ जो छुप छुप रोई तुझसे छुपी ना कोई,

हरी तूने हर पीड़ा दुखियन की॥

ओ माँ...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।