माँ देवी कालरात्रि मंत्र

पारंपरिक
श्री कृष्ण मंत्र दुर्गा भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा,

वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा,

वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा,

वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा,

वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा,

वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा,

वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा,

वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा,

वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा,

वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा,

वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा,

वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा,

वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा,

वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा,

वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा,

वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा,

वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा,

वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा,

वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा,

वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा,

वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा,

वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा,

वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा,

वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा,

वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।