बुलावा माँ का आया है

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

बुलावा माँ का आया है,

चलो कैलाश चले....-2

संदेसा माँ क आया है,

चलो कैलाश चले....-2

जो भी गया द्वार माता के, खाली हाथ ना आया,

राजा हो या रंक सभी ने, मनवांछित वर पाया......-2

चल चले हौले हौले अक्सर यही आया हूँ,

चलो कैलाश चले.......

बुलावा माँ का आया है,

चलो कैलाश चले.......

माँ ही दुर्गा, माँ ही काली, माँ ही शेरावाली,

माँ ही सरस्वती, माँ ही वैष्णवी, माँ नौ रूपों वाली.....-2

बोलो बोलो जय बोलो माँ ने बुलाया है,

चलो कैलाश चले.......

बुलावा माँ का आया है,

चलो कैलाश चले.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।