मां भक्तों ने घेर लई अकेली भवन चली

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मां भक्तों ने घेर लई अकेली भवन चली.....-2

गोरे गोरे माथे पे लाल लाल बिंदिया,

मांग सिंदूर भरी अकेली भवन चली,

मां भक्तों ने घेर लई अकेली भवन चली॥

मैया जी के गले में फूलों की माला,

बीच में चंपा कली अकेली भवन चली,

मां भक्तों ने घेर लई अकेली भवन चली॥

गोरे गोरे हाथों में लाल लाल चूड़ियां,

हथेली में मेहंदी रची अकेली भवन चली,

मां भक्तों ने घेर लई अकेली भवन चली॥

गोरे गोरे पांव में पायल सोहे,

मां ठुमक ठुमक निकली अकेली भवन चली,

मां भक्तों ने घेर लई अकेली भवन चली॥

मंदिर का पुजारी यूं बोला मां से,

बन ठन कहां को चली अकेली भवन चली,

मां भक्तों ने घेर लई अकेली भवन चली॥

मेरे भक्तों के संकट भारी,

मैं संकट हरने चली अकेली भवन चली,

मां भक्तों ने घेर लई अकेली भवन चली.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।