जाने तुम कहाँ गये कान्हा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जाने तुम कहाँ गये कान्हा,

मुरली मधुर सुना कर के,

सूने मधुवन में आ के तू कर दे सवेरा,

आये तेरी याद है,

आये तेरी याद है,

आये तेरी याद है,

छलिया तू छुप गया कहाँ,

तुझ बिन तड़पते हम यहाँ,

सूने मधुवन में आ के तू कर दे सवेरा,

आये तेरी याद है,

आये तेरी याद है,

आये तेरी याद है।

माखन चुराते थे सबपे लुटाते थे,

खेले थे आँख मिचोली,

तुम छुप जाते थे नज़र मिलाते थे,

याद करे हम जोली,

बागो में कलियों में, ब्रज की गलियों में,

दिखता था मुखड़ा तुम्हारा,

गैया चराते थे सबको लुभाते थे,

तोड़ा है दिल क्यों हमारा,

कैसे भुलायेंगे तुझे, सबके ही मन बुझे बुझ,

सबके ही होठों पे रहता है बस नाम तेरा,

आये तेरी याद है,

आये तेरी याद है,

आये तेरी याद है।

यमुना के तट पे कभी पनघट पे करते थे रोज़ इशारे,

बाते बनाते थे हमको सताते थे खेल थे अजब तुम्हारे,

मुरली सुनाते थे जिया तड़पाते थे करते थे मीठी मीठी बाते,

रास रचाते थे सबको नाचते थे होती थी रोज़ मुलाकातें,

आजा तू कान्हा दौड़ के, दुनिया को सारे छोड़ के,

छाया है तेरे बिन मन में सभी के अंधेरा,

आये तेरी याद है,

आये तेरी याद है,

आये तेरी याद है,

जाने तुम कहाँ गये कान्हा,

मुरली मधुर सुना कर के,

सूने मधुवन में आ के तू कर दे सवेरा,

आये तेरी याद है,

आये तेरी याद है,

आये तेरी याद है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।