कभी तो गरीबों के घर आजा माहामाई

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ओ घेरा दुःख ने है पाया,

घेरा दुःख ने है पाया,

जान लबा उत्ते आई, तू वि सुनी ना दुहाई,

हो तू वि सुनी ना दुहाई, माये सुनी ना दुहाई।

आँखों में आंसू भर के देते है दुहाई,

आँखों में आंसू भर के देते है दुहाई,

कभी तो गरीबों के घर आजा माहामाई,

आँखों में आंसू भर के,

खो गया दुश्मन अपना ही साया,

क्यों तुमको हम पर रहम ना आया,

अब तो घटाए गम की,

हो… अब तो घटाए गम की ज़िन्दगी में छायी,

कभी तो गरीबों के घर आजा माहामाई,

आँखों में आंसू भर के।

हाय ठोकर है, दिल टूट गया,

लगता है जहां ही रूठ गया,

हम जिसको बसाते उजड़ गयी,

माँ वो भी हम को लूट गया,

सब वैर यहाँ कोई ग़मख़ार ना,

अब तो किस दिन ही हमको ऐतबार माँ,

देके मोहब्बत हमने,

हो… देके मोहब्बत हमने नफरत ही पायी,

कभी तो गरीबों के घर आजा माहामाई,

आँखों में आंसू भर के देते है दुहाई

कभी तो गरीबों के घर आजा माहामाई

आँखों में आंसू भर के।

जग मतलब का, नहीं उससे गिला,

नफरत ही सही चल कुछ तो मिला,

पर तुम तो दया की देवी हो,

ना सोचा हमारा तुमने भला,

ये दुनिया रही दिन रात सता,

अब जाये कहाँ मैया तू ही बता,

तुमको निर्दोषो की माँ,

हो… तुमको निर्दोषो की माँ याद क्यों ना आयी,

कभी तो गरीबों के घर आजा माहामाई,

आँखों में आंसू भर के देते है दुहाई,

कभी तो गरीबों के घर आजा माहामाई,

आँखों में आंसू भर के देते है दुहाई,

कभी तो गरीबों के घर आ जा माहामाई

आँखों में आंसू भर के.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।