हनुमत कहाँ तुमने देरी लगायी

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

( तेरे आने में कैसे विलम्ब हो गया,

अंजनी लाला ये कैसा सितम हो गया,

माँ सुमित्रा को कैसे करूँगा खबर,

गहरी निद्रा में तेरा लखन सो गया। )

हनुमत हनुमत हनुमत हनुमत,

हनुमत हनुमत हनुमत हनुमत,

हनुमत कहाँ तुमने देरी लगायी,

हनुमत कहाँ तुमने देरी लगायी,

जुदा हो रहा है यहाँ मेरा भाई,

तेरे बिन नहीं अब ना कोई सहायी,

तेरे बिन नहीं अब ना कोई सहायी,

जुदा हो रहा है यहाँ मेरा भाई,

हनुमत कहाँ तुमने देरी लगायी,

जुदा हो रहा है यहाँ मेरा भाई॥

विधाता ये दिन तूने कैसा दिखाया,

सिया खोयी मैंने लखन भी गवाया,

लखन के बिना राम कैसे जियेगा,

बिछुड़ने का गम भाई कैसे पियेगा,

है मुमकिन पवनसुत को बूटी ना पायी,

है मुमकिन पवनसुत को बूटी ना पायी,

जुदा हो रहा है यहाँ मेरा भाई,

हनुमत कहाँ तुमने देरी लगायी,

जुदा हो रहा है यहाँ मेरा भाई॥

भरत शत्रुघन से ना नज़रें मिलेंगी,

नगरवासियों की ना बातें झिलेंगी,

सजन मेरे कीमूल को झलकी दिखा दो,

कहे उर्मिला मेरे पी से मिला दो,

रो रो के मरे मेरी कौशल्या माई,

रो रो के मरे मेरी कौशल्या माई,

जुदा हो रहा है यहाँ मेरा भाई,

तेरे बिन नहीं अब ना कोई सहायी,

तेरे बिन नहीं अब ना कोई सहायी,

जुदा हो रहा है यहाँ मेरा भाई,

हनुमत कहाँ तुमने देरी लगायी,

जुदा हो रहा है यहाँ मेरा भाई॥

शत्रु ने कैसा वार किया है,

दुश्मन ने कैसा वार किया है,

ज़ालिम ने कैसा वार किया है,

पापी ने कैसा वार किया है,

हनुमत हनुमत हनुमत हनुमत......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।