देवी मैया के मंदिर में ले चल रे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

देवी मैया के मंदिर में ले चल रे लांगुरिया,

देवी मैया के मंदिर में संग चलूंगी लांगुरिया,

देवी मैया के मंदिर में ले चल रे लांगुरिया॥

गाड़ी में चलेंगे, लांगुरिया,

मोटर में चलेंगे, लांगुरिया,

टमटम में चलेंगे, लांगुरिया,

ठेले में चलेंगे, लांगुरिया,

बुग्गी में चलेंगे, लांगुरिया,

रेल में चलेंगे, लांगुरिया,

हम कार में चलेंगे, लांगुरिया,

टाटा में चलेंगे, लांगुरिया,

हम गाते में चलेंगे, लांगुरिया,

हम नाचते में चलेंगे, लांगुरिया,

गठजोड़े की जात तू लगवा दे रे लांगुरिया,

देवी मैया के मंदिर में ले चल रे लांगुरिया,

देवी मैया के मंदिर में संग चलूंगी लांगुरिया,

देवी मैया के मंदिर में ले चल रे लांगुरिया,

लांगुरिया,लांगुरिया, लांगुरिया।

हम फूल ,चढ़ावें मैया कूँ,

हम भेंट,चढ़ावें मैया कूँ,

हम ज्योत जगावे, मैया कूँ,

हम चोला पहनावे, मैया कूँ,

हम राग सुनावे, मैया कूँ,

हम तिलक लगावे, मैया कूँ,

हम भोग लगावे, मैया कूँ,

हम ज्योत जगावे, मैया कूँ,

हम भेंट,चढ़ावें मैया कूँ,

हम ज्योत जगावे, मैया कूँ,

हम भोग लगावे, मैया कूँ,

खाली म्हारी गोदी तू भरवा ले आ लांगुरिया,

देवी मैया के मंदिर में ले चल रे लांगुरिया,

देवी मैया के मंदिर में संग चलूंगी लांगुरिया,

देवी मैया के मंदिर में ले चल रे लांगुरिया,

लांगुरिया,लांगुरिया, लांगुरिया।

जरा जोर से बोलो, जय माता दी,

जरा सारे बोलो, जय माता दी

मिलकर बोलो, जय माता दी

दुखड़ा खोलो, जय माता दी

मेरी नैना देवी, जय माता दी

मेरी चिंतपूर्णी, जय माता दी

माँ ज्वाला देवी, जय माता दी

है कांगड़ा देवी, जय माता दी

शाकुंभरी देवी, जय माता दी

चामुण्डा देवी, जय माता दी

कोई मूल नहीं लगदा, जय माता दी

जीभ नहीं दुखती, जय माता दी

टिकट कटा लो, जय माता दी

जम्मू पहुंचो, जय माता दी

कटरा पहुंचो, जय माता दी

गर्ब चढ़ाई, जय माता दी

बाण गंगा, जय माता दी

मल मल नहाओ, जय माता दी

गोते लाओ, जय माता दी

रे चरणपादुका, जय माता दी

मैया आधकुवारी, जय माता दी

गर्भजून में,, जय माता दी

लगे चौरासी, जय माता दी

अरे हाथी मत्था, जय माता दी

सांझी छता, जय माता दी

चढ़ते जाओ, जय माता दी

मत घबराओ, जय माता दी

भवन आ गया, जय माता दी

हरियल पीपल, जय माता दी

अरे तोता बोले, जय माता दी

गुफा के अंदर, जय माता दी

मेरी मैया बैठी, जय माता दी

दर्शन करलो, जय माता दी

अरदास लगालो, जय माता दी

मेरी माँ को मनालो, जय माता दी

भोग लगालो, जय माता दी

वो अन्न धन देवे, जय माता दी

वो भक्ति देवे, जय माता दी

वो शक्ति देवे, जय माता दी

भंडार भरेगी, जय माता दी

बेड़ा पार परेगी, जय माता दी,

देवी मैया के मंदिर में ले चल रे लांगुरिया,

देवी मैया के मंदिर में संग चलूंगी लांगुरिया,

देवी मैया के मंदिर में ले चल रे लांगुरिया.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।