दुर्गे नाम का सुमिरन करो

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

दुर्गे नाम का सुमिरन करो रे बन्दे,

दुर्गे नाम का सुमिरन करो रे बन्दे,

दुर्गे नाम का सुमिरण करो रे बंदे,

दुर्गे नाम का सुमिरन करो रे बन्दे।

रात और सुबह शाम बोलो माँ का नाम,

रात और सुबह शाम बोलो माँ का नाम।

हे दाता दानी ओ महारानी,

चरणों की तेरे पूजा करूँ,

हे दाता दानी ओ महारानी,

चरणों की तेरे पूजा करूँ,

तुम आज इतना जो दे रही हो,

तुम आज इतना जो दे रही हो,

तुमको अनंतम प्रणाम,

दुर्गे नाम का सुमिरन करो रे बन्दे,

हो...

दुर्गे नाम का सुमिरन करो रे बन्दे,

दुर्गे नाम का सुमिरन करो रे बन्दे,

दुर्गे नाम का सुमिरन करो रे बन्दे,

रात और सुबह शाम बोलो माँ का नाम,

रात और सुबह शाम बोलो माँ का नाम।

सुख चैन यश बल देनेवाली माँ,

युग युग में तेरी हो आरती,

सुख चैन यश बल देनेवाली माँ,

युग युग में तेरी हो आरती,

नारायणी दुर्गा लक्ष्मी माँ,

नारायणी दुर्गा लक्ष्मी माँ,

तुमको अनंतम प्रणाम,

दुर्गे नाम का सुमिरण करो रे बंदे,

दुर्गे नाम का सुमिरन करो रे बन्दे,

दुर्गे नाम का सुमिरन करो रे बन्दे,

दुर्गे नाम का सुमिरन करो रे बन्दे,

रात और सुबह शाम बोलो माँ का नाम,

रात और सुबह शाम बोलो माँ का नाम......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।