उड़ उड़ जा रे पंछी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

उड़ उड़ जा रे पंछी मैया से कहियो रे,

कहियो तेरा लाल... तेरी याद करे,

उड़ उड़ जा रे पंछी मैया से कहियो रे,

उड़ उड़ जा रे पंछी।

ऊँचे पर्वतो पे देखो मैया जी विराजी हैं,

वैष्णो देवी कहके दुनिया बुलाती हैं,

शेरावाली कह के सारी दुनिया बुलाती है,

मेरे मन की बातें सारी मैया से कहियो रे,

उड़ उड़ जा रे पंछी मैया से कहियो रे,

उड़ उड़ जा रे पंछी।

माँ का भवन जब तेरे नज़दीक आएगा,

माँ से मिलन का आनंद बढ़ता ही जायेगा,

मैया जी के पास मेरी अर्ज़ी लगाइयो रे,

उड़ उड़ जा रे पंछी मैया से कहियो रे,

उड़ उड़ जा रे पंछी।

दर्शन माँ का जब नैन तेरे पाएंगे,

एक साथ कई जन्मों के पाप धूल जायेंगे,

मैया के चरण में गोपी लोट लोट जइयो रे,

उड़ उड़ जा रे पंछी मैया से कहियो रे,

उड़ उड़ जा रे पंछी।

उड़ उड़ जा रे पंछी मैया से कहियो रे,

कहियो तेरा लाल... तेरी याद करे,

उड़ उड़ जा रे पंछी मैया से कहियो रे,

उड़ उड़ जा रे पंछी।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।