जब भोले बाबा की शादी हुई थी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जब भोले बाबा की शादी हुई थी,

ढोल, नगाड़ा, शहनाई बजी थी,

जब भोले बाबा की शादी हुई थी,

ढोल, नगाड़ा, शहनाई बजी थी,

भोले आये भोले आये जोगी के भेस में,

हो भोले आये जोगी के भेस में॥

शिव आये ले अपनी बैल की सवारी,

जोगी का रूप लिए त्रिशूलधारी,

हो शिव आये ले अपनी बैल की सवारी,

जोगी का रूप लिए त्रिशूलधारी,

देवो ने कैसे कैसे रूप लिये,

केश किये लम्बे घने घने,

केश किये लम्बे घने घने,

राहु रोवे तो केतु हसावे,

हा राहु रोवे तो केतु हसावे,

धड़ना दिया भी उछल कूद जावे,

सब पहुंचे, सब पहुंचे प्रजापती के देस में,

हो सब पहुंचे प्रजापती के देस में।

देख रूप ये शिव का गौरा जी बोली,

छोड़ो महादेव ये आँख मिचोली,

हा देख रूप ये शिव का गौरा जी बोली,

छोड़ो महादेव ये आँख मिचोली,

अपने दर्श दिखाओ अपने रूप में आओ,

अपने रूप में आओ,

मैया के दर्शन जो देवो ने पाये,

मैया के दर्शन जो देवो ने पाये,

हाथो को जोड़ अपने रूप में आये,

शिव आये हा शम्भू आये दूल्हा के भेस में,

शिवरात्रि मनी पूरे देस में।

जब भोले बाबा की शादी हुई थी,

ढोल, नगाड़ा, शहनाई बजी थी,

भोले आये भोले आये जोगी के भेस में,

हो भोले आये जोगी के भेस में॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।