राधे तेरे बरसाने मंजिल गर मिल जाये

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

राधे तेरे बरसाने, मंजिल गर मिल जाये,

दुनिया की दलदल से, जीवन यह निकल जाये॥

तेरा धाम ये बरसाना, तीहुंलोक से न्यारा है,

चले मंद सुगन्ध जहां, बहती रसधारा है,

रस अमृत पी करके, मुक्ति यहां मिल जाये,

दुनिया की दलदल से, जीवन यह निकल जाये,

राधे तेरे बरसाने, मंजिल गर मिल जाये॥

तेरे बरसाने बसती, सुख शान्ति परम भक्ति,

तेरी प्रेम नगरिया में, अद्धभुत है भरी मस्ती,

इक बार जो आ जाये, तकदीर बदल जाये,

दुनिया की दलदल से, जीवन यह निकल जाये,

राधे तेरे बरसाने, मंजिल गर मिल जाये॥

कान्हा भी दीवाना तेरा, निशदिन यहां आता है,

रस ले के तुम्हीं से मधुप, बंसी को बजाता है,

रस भरदो मुझमें भी, तन मन यह खिल जाये,

दुनिया की दलदल से, जीवन यह निकल जाये,

राधे तेरे बरसाने, मंजिल गर मिल जाये॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।