ये घोटेदार चुनरी आई माँ ओढ़ के

पारंपरिक
श्री गणेश भजन दुर्गा भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

ये घोटेदार चुनरी आई माँ ओढ़ के,

आई माँ ओढ़ के......-2

गणपति आए संग म्ह भोले भी आए,

गोरा भी आ गई कैलाश अपना छोड़ के,

ये घोटेदार चुनरी आई माँ ओढ़ के,

आई माँ ओढ़ के.......

मोहन आए संग म्ह दाऊ भी आए,

राधा भी आ गई वो बरसाने को छोड़ के,

ये घोटेदार चुनरी आई माँ ओढ़ के,

आई माँ ओढ़ के.......

राम भी आए संग म्ह लक्ष्मण भी आए,

सीता भी आ गई वा कुटियाँ को छोड़ के,

ये घोटेदार चुनरी आई माँ ओढ़ के,

आई माँ ओढ़ के.......

भैरो भी आया संग म्ह लागुर भी आया,

शेर भी आ गया वो पहाड़ो को छोड़ के,

ये घोटेदार चुनरी आई माँ ओढ़ के,

आई माँ ओढ़ के.......

आए है नौराते हम ज्योत जगाएगे,

माता के भेट गाए दोनों हाथ जोड़ के,

ये घोटेदार चुनरी आई माँ ओढ़ के,

आई माँ ओढ़ के......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।