माँ कुष्मांडा जी की आरती

पारंपरिक
माता दुर्गा आरती दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ आरती तेरी गाते, मैया आरती तेरी गाते,

कुष्मांडा महामाया, हम तुमको ध्याते,

माँ आरती तेरी गाते.......

हे जगदम्ब द्यामयी, आदि स्वरूपा माँ,

देव ऋषि मुनि ज्ञानी, गुण तेरे गाते,

माँ आरती तेरी गाते.......

कर ब्रह्माण्ड की रचना, कुष्मांडा कहलाये,

वेद पुराण भवानी, सब यही बतलाते,

माँ आरती तेरी गाते......

सूर्य लोक निवासिनी, तुमको कोटी प्रणाम,

सम्मुख तेरे पाप और, दोष ना टिक पाते,

माँ आरती तेरी गाते......

अष्ट भुजे महाशक्ति, सिंह वाहिनी है तू,

भव सिंधु से तरते, दर्शन जो पाते,

माँ आरती तेरी गाते......

अष्ट सिद्धि नौ निधियाँ, हाथ तेरे माता,

पा जाते है सहज ही, जो तुमको ध्याते,

माँ आरती तेरी गाते.....

शास्त्र विधि से विधिवत, जो पूजन करते,

आदि शक्ति जगजननी, तेरी द्या पाते,

माँ आरती तेरी गाते......

नवदुर्गो में मैया, चौथा स्थान तेरा,

चौथे नवरात्रे को, भक्त तुझे ध्याते,

माँ आरती तेरी गाते......

आधि व्याधि सब हरके, सुख समृद्धि दो,

हे जगदम्ब भवानी, इतनी द्या चाहते,

माँ आरती तेरी गाते........

कुष्मांडा जी की आरती, जो कोई गावे,

कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे,

माँ आरती तेरी गाते......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।