दीनों के हो दयालु थोड़ी सी दया करदो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

दीनों के हो दयालु, थोड़ी सी दया करदो,

तेरे दर पे आ गिरा हूँ, मुझको ज़रा संभालो.....-2

कल थे जो मेरे अपने, सब हो गए पराए,

मुश्किल की इस घड़ी में, कोई ना काम आए,

अपना मुझे बना कर, दुनिया को ये बता दो,

दीनों के हो दयालु, थोड़ी सी दया करदो,

तेरे दर पे आ गिरा हूँ, मुझको ज़रा संभालो,

दीनों के हो दयालु, थोड़ी सी दया करदो॥

कश्ती भँवर में मेरी, सूझे नहीं किनारा,

कोशिश तमाम कर ली, मिलता नहीं सहारा,

मैं पुकार कर रहा हूँ, आकर मुझे निकालो,

दीनों के हो दयालु, थोड़ी सी दया करदो,

तेरे दर पे आ गिरा हूँ, मुझको ज़रा संभालो,

दीनों के हो दयालु, थोड़ी सी दया करदो॥

तेरे दर का मैं भिखारी, बन करके अब रहूँगा,

तेरे चरणों में ‘अमित’ अपने, ये प्राण त्याग देगा,

मेरा हाथ अब पकड़ कर, मुझे हृदय से लग लो,

दीनों के हो दयालु, थोड़ी सी दया करदो,

तेरे दर पे आ गिरा हूँ, मुझको ज़रा संभालो,

दीनों के हो दयालु, थोड़ी सी दया करदो॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।