मईया शेर पे चढ़के आजा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मईया शेर पे चढ़के आजा, तेरे भगत खड़े हैं गली गली.....-2

मैया कैसा जल है चढाना, तेरे पूछे भगत जन गली गली,

मईया शेर पे चढ़के आजा, तेरे भगत खड़े हैं गली गली॥

मैया कैसा दीप जलाए, तेरी रोशन हो जाए गली गली,

मईया शेर पे चढ़के आजा, तेरे भगत खड़े हैं गली गली॥

मैया कैसा भोग लगाए, तेरी कृपा बरसे गली गली,

मईया शेर पे चढ़के आजा, तेरे भगत खड़े हैं गली गली॥

मैया कैसी भेटें गाए, तेरे नाचे भगत जन गली गली,

मईया शेर पे चढ़के आजा, तेरे भगत खड़े हैं गली गली॥

मैया कैसा चोला चढाये, चोले की चमक जाए गली गली,

मईया शेर पे चढ़के आजा, तेरे भगत खड़े हैं गली गली॥

मैया कैसे तुझे मनाए, जयकारा गूजे गली गली,

मईया शेर पे चढ़के आजा, तेरे भगत खड़े हैं गली गली॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।