इस योग्य हम कहां हैं

पारंपरिक
महादेव भजन गुरुदेव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

इस योग्य हम कहां हैं, गुरुवर तुम्हें रिझायें,

फिर भी मना रहे हैं, शायद तो मान जायें॥

जब से जन्म लिया है, विषयों ने हमको घेरा,

छल और कपट ने डाला, इस भोलेपन पे डेरा,

सद्बुद्धि को अहम ने, हरदम रखा दबाये,

इस योग्य हम कहां हैं, गुरुवर तुम्हें रिझायें॥

जग में जहां भी देखा, बस एक ही चलत है,

इक दूसरे के सुख से, खुद को बड़ी जलन है,

कर्मो का लेखा जोखा, कोई समझ ना पाये,

इस योग्य हम कहां हैं, गुरुवर तुम्हें रिझायें॥

निशचय ही हम पतित हैं, लोभी हैं स्वार्थी हैं,

तेरा ध्यान जब लगायें, माया पुकारती है,

सुख भोगने की इच्छा, कभी तृप्त हो ना पाये,

इस योग्य हम कहां हैं, गुरुवर तुम्हें रिझायें॥

जब कुछ ना कर सकें तो, तेरी शरण में आयें,

अपराध मानते हैं, झेलेंगे सब सजायें,

गोविंद से अब मिलादे, कुछ और हम ना चाहें,

इस योग्य हम कहां हैं, गुरुवर तुम्हें रिझायें,

फिर भी मना रहे हैं, शायद तो मान जायें,

इस योग्य हम कहां हैं, गुरुवर तुम्हें रिझायें.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।