होके शेरों के रथ पे सवार

पारंपरिक
हनुमान जी भजन दुर्गा भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

होके शेरों के रथ पे सवार मैया पावागढ़ से चली,

तेरी मैदां में... चमके तलवार मैया पावागढ़ से चली,

होके शेरों के रथ पे सवार मैया पावागढ़ से चली॥

बजरंग है आला तो भेरू है काला,

भूतो की टोली संग कलुआ है काला,

ओ रही पल-पल में... किलकारी मार मैया पावागढ़ से चली,

होके शेरों के रथ पे सवार मैया पावागढ़ से चली॥

चंदा सी माथे पे बिंदिया सुहानी,

बैठी है रथ पे वो रण की दीवानी,

वो करे पल-पल में... दुष्टो का संहार मैया पावागढ़ से चली,

होके शेरों के रथ पे सवार मैया पावागढ़ से चली॥

ओ काली महाकाली, माँ दुर्गा खप्पर वाली

अपार तेरी माया, क्या समझेंगे मवाली,

आंखों मे भरी लाली, वो पिये मद की प्याली,

है चोंसठ जोगन संग में, ओर ढंकिनी बैताली,

कुछ आशाओ को लेकर, आया है एक सवाली,

वो दोनों मिलकर तड़पे, जाऊँ ना हाथ खाली,

हाथ खाली यहाँ से अगर जाऊंगा,

ताना देगा जमाना किधर जाऊंगा,

भीख दोगी तो इस दर से घर जाऊंगा,

वरना यह कह कर चोखट पे मर जाऊंगा,

ओ मेरी सुनले... ओ मैया पुकार मैया पावागढ़ से चली,

होके शेरो के रथ पे सवार मैया पावागढ़ से चली॥

जिसने मुसीबत में माँ को पुकारा,

माँ ने दिया है उसी को सहारा,

ओ मेरी सुनले ओ... मैया पुकार मैया पावागढ़ से चली,

होके शेरों के रथ पे सवार मैया पावागढ़ से चली॥

दुनिया ने बेहद सताया है मैया,

फरियाद ले कर के आया हूँ मैया,

ओ मेरी नैया... लगा दे तू पार मैया पावागढ़ से चली,

होके शेरों के रथ पे सवार मैया पावागढ़ से चली,

मैया पावागढ़ से चली,

मैया पावागढ़ से चली,

मैया पावागढ़ से चली......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।