इस महारानी के प्यार म्हं कही पागल ना हो जाऊँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

इस महारानी के प्यार म्हं कही पागल ना हो जाऊँ,

हो कही पागल ना हो जाऊँ.....-2

शेर पे चढ़के या रण म्हं आवै,

रण भूमि म्हं दो हाथ दिखावै,

में इसके शेर नै देख के कही पागल ना हो जाऊँ,

इस महारानी के प्यार म्हं कही पागल ना हो जाऊँ,

हो कही पागल ना हो जाऊँ.....

इसके के सिर पे मुकुट विराजे,

इसके तन म्हं चोला साजे,

इसके चोले नै देख के कही पागल ना हो जाऊँ,

इस महारानी के प्यार म्हं कही पागल ना हो जाऊँ,

हो कही पागल ना हो जाऊँ.....

दर्शन का तने मौका मिल रहया,

इस पै रूप गजब का खिल रहया,

मैं इसके रूप नै देख के कही पागल ना हो जाऊँ,

इस महारानी के प्यार म्हं कही पागल ना हो जाऊँ,

हो कही पागल ना हो जाऊँ.....

कह मुरारी शरण म्हं आ आजा,

एक बै मईया दर्शन दिखा जा,

इसके दर्शन करके कही पागल ना हो जाऊँ,

इस महारानी के प्यार म्हं कही पागल ना हो जाऊँ,

हो कही पागल ना हो जाऊँ.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।