बड़ी ही दयालु मेरी ज्योतावाली माता

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सबका बेड़ा तारे माँ काज सवारे,

इसकी नज़रो में है एक जैसे सारे,

हर महादानी यहाँ दान लेने आता,

बड़ी ही दयालु मेरी ज्योतावाली माता,

महा कृपालू मेरी लाटांवाली माता,

बड़ी ही दयालु मेरी ज्योतावाली माता,

महा कृपालू मेरी लाटांवाली माता।

हर शरणागत पर मेहरो की है बारिश करती,

हे माता

है दुखड़े सारे दुखियो पलछिन में हरती,

हे माता

गम के गहरे सागर से भक्तो को निकाले,

हे माता

जो जीवन पथ से भटक गये है उनके संभाले,

हे माता

तभी तो जहां यहाँ झोली फैलाता,

बड़ी ही दयालु मेरी ज्योतावाली माता,

महा कृपालू मेरी लाटांवाली माता,

बड़ी ही दयालु मेरी ज्योतावाली माता,

महा कृपालू मेरी लाटांवाली माता।

दो निष्ठा के ले पुष्प बड़ा ही खुश है होती,

हे माता

है कंकर छूकर राहो के कर देती मोती,

हे माता

हर उलझन भारी जीवन की सुलझा है देती,

हे माता

अरे अंधो को भी जगमग दीप जला है देती,

हे माता

इसका ही दिया अन्न सारा जग खाता,

बड़ी ही दयालु मेरी ज्योतावाली माता,

महा कृपालू मेरी लाटांवाली माता,

बड़ी ही दयालु मेरी ज्योतावाली माता,

महा कृपालू मेरी लाटांवाली माता।

सबका बेड़ा तारे माँ काज सवारे,

इसकी नज़रो में है एक जैसे सारे,

हर महादानी यहाँ दान लेने आता,

बबड़ी ही दयालु मेरी ज्योतावाली माता,

महा कृपालू मेरी लाटांवाली माता,

बड़ी ही दयालु मेरी ज्योतावाली माता,

महा कृपालू मेरी लाटांवाली माता,

बड़ी ही दयालु मेरी ज्योतावाली माता,

महा कृपालू मेरी लाटांवाली माता,

बड़ी ही दयालु मेरी ज्योतावाली माता,

महा कृपालू मेरी लाटांवाली माता.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।