मैं मैं छोड़ माँ माँ बोल

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैं मैं छोड़, माँ माँ बोल xll-ll

ये नाम, बड़ा अनमोल xll

मैं मैं छोड़, माँ माँ बोल xll-ll

ये मैंने किया, वो मैंने किया,

"क्या तूने किया, माँ जानती है" l

तूँ क्या है तेरी, औक़ात है क्या,

"तेरी रग रग को, पहचानती है" ll

अब भी वक़्त है, संभल जा वर्ना l

खुल जाएगी तेरी पोल,,,

मैं मैं छोड़, माँ माँ बोल xll-ll

रावण भी, मैं मैं करता था,

"दस शीश कटे, वो मारा गया" l

हिरण्य कश्यप को, जांघो पे,

"रख पेट था, उसका फाड़ा गया" ll

जिसने खुद पर, अभिमान किया l

फिर उसका हो गया बिस्तर गोल,,,

मैं मैं छोड़, माँ माँ बोल xll-ll

सम्मान मान, सब माँ का है,

"ये जीवन भी तो, माँ ने दिया" l

अपना तो इसमें, कुछ भी नहीं,

"सब माँ ने दिया, सब माँ ने दिया" ll

साँसों का ये, पंछीं इक दिन l

उड़ जायेगा तन का पिंजरा खोल,,,

मैं मैं छोड़, माँ माँ बोल xll-ll

यह बात, बहुत ही सच्ची है,

"क्यों, तेरी समझ में आती नहीं" l

जिस घर में, माँ की ज्योत जगे,

"वहाँ, बुरी नज़र कभी जाती नहीं" ll

चंचल जो, माँ के बच्चे हैं l

नहीं होते कभी वो डाँवाडोल,,,

मैं मैं छोड़, माँ माँ बोल xll-ll

ये नाम, बड़ा अनमोल* xll

मैं मैं छोड़, माँ माँ बोल xll-ll

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।