मुझे दर्शन दे गई माँ कल रात सोते सोते

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मुझे दर्शन दे गई माँ, कल रात सोते सोते

मुझे दर्शन दे गई माँ, कल रात सोते सोते

फिर बीती रात मेरी, माँ से बात होते होते,

माँ से बात होते होते,

मुझे दर्शन दे गई माँ,

मुझे दर्शन दे गई मां।

मुझे याद है अभी भी, वो रात का नज़ारा,

वो रात का नज़ारा,

माँ सामने खड़ी थी, आभास होते होते,

फिर बीती रात मेरी, माँ से बात होते होते,

माँ से बात होते होते,

मुझे दर्शन दे गई माँ........

जैसी सामने ये मुरत, वैसी ही मैंने देखी,

वैसी ही मैंने देखी,

मैं तो चरणों में पड़ा था,

मैं तो चरणों में पड़ा था, यूँ निहाल होते होते,

फिर बीती रात मेरी, माँ से बात होते होते,

माँ से बात होते होते,

मुझे दर्शन दे गई माँ.......

वो गीले वो सारे शिकवे, जो जरा मैं माँ से कहता,

जो जरा मैं माँ से कहता,

सब भूलते ही जाते,

सब भूलते ही जाते, मुझे याद होते होते,

फिर बीती रात मेरी, माँ से बात होते होते,

माँ से बात होते होते,

मुझे दर्शन दे गई माँ.......

मुझे गोद में बिठाया, और प्यार से माँ बोली,

और प्यार से माँ बोली,

तूँ तो अब भी रो रहा है, मेरे पास होते होते,

मेरे पास होते होते,

फिर बीती रात मेरी, माँ से बात होते होते,

माँ से बात होते होते,

मुझे दर्शन दे गई माँ, कल रात सोते सोते

कल रात सोते सोते

फिर बीती रात मेरी, माँ से बात होते होते,

माँ से बात होते होते ,

मुझे दर्शन दे गई माँ,

मुझे दर्शन दे गई मां........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।