लुट रहा रे मैया का खजाना

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

लुट रहा, लुट रहा, लुट रहा रे,

मैया का खजाना लुट रहा रे,

मैया का ख़जाना लुट रहा रे,

शेरावाली का खजाना लुट रहा रे,

लुट रहा, लुट रहा, लुट रहा रे,

मैया का खजाना लुट रहा रे।।

लूट सके तो लूटले बन्दे,

काहे देरी करता है,

ऐसा मौका फिर ना मिलेगा,

क्यों नहीं झोली भरता है,

माँ की शरण में आ करके के,

जो कुछ भी माँगा, मिल गया रे,

लुट रहा, लुट रहा, लुट रहा रे,

मैया का खजाना लुट रहा रे।

हाथों हाथ मिलेगा परचा,

ये दरबार निराला है,

घर घर पूजा हो कलयुग में,

भक्तों का बोलबाला है,

जिसने भी माँ का नाम लिया,

किस्मत का ताला खुल गया रै,

लुट रहा, लुट रहा, लुट रहा रे,

मैया का खजाना लुट रहा रै।

मैया जैसा इस दुनिया में,

कोई भी दरबार नहीं,

ऐसी दयालू बनवारी को,

करती कभी इंकार नहीं,

कौन है ऐसा दुनिया में,

जिसको ये मैया लूट गई रे,

लुट रहा, लुट रहा, लुट रहा रे,

मैया का खजाना लुट रहा रे........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।