जग का सताया माँ तेरी शरण में आया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

( इस असार संसार से,

होकर के बेचैन,

आया तेरी शरण भवानी,

शरण पडूँ दिन रैन,

संकट हरनी मंगल करणी,

वो भय हरणी मात,

करुणा कर करुणामई,

माँ मेरे सर पर रख दो हाथ। )

जग का सताया तेरी शरण में आया,

मेरे कष्ट मिटा दो मैया,

हो अम्बे मैया, हो अम्बे मैया,

मैया दुर्गे मैया,

तू जग माता जन सुख दाता,

सिंह वाहिनी मैया,

हो अम्बे मैया, हो अम्बे मैया,

मैया दुर्गे मैया।

दीनन के दुःख हर लो भवानी,

नहीं देख्यो तुम सम कोई दानी,

सब की मंशा पूरी करो माता,

महिमा अमित जगत विख्याता,

तू ही वैष्णवी, तू ही रुद्राणी,

तू ही शारदा मैया,

हो अम्बे मैया, हो अम्बे मैया,

मैया दुर्गे मैया।

रमा राधिका श्यामा काली,

तू ही मात संतान प्रतिपाली,

उमा माधवी चंडी ज्वाला,

बेग मोहि पर होवू दयाला,

दुर्गा दुर्ग विनाशिनी माता,

पार लगा दो नैया,

हो अम्बे मैया, हो अम्बे मैया,

मैया दुर्गे मैया।

वज्र धारिणी शोक नाशिनी,

आयु रक्ष्नी विंध्य वासिनी

जया और विजया बेताली,

माँ तू संकटा अरु विकाली,

नाम अनंत तुम्हारा भवानी,

दया करो मेरी मैया,

हो अम्बे मैया, हो अम्बे मैया,

मैया दुर्गे मैया।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।