साथ हमारा छूटे कभी ना

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

साथ हमारा, छूटे कभी ना,

छूटे चाहे जहाँ,

जो तुझसे मुझे, मिलता है मैया,

प्यार मिलेगा कहाँ,

माँ ओ माँ, मेरी माँ,

साथ हमारा छूटे कभी ना.......

रौनक जग की झूठी चमक है,

प्यार है तेरा सच्चा दाती,

ममतामई तेरी प्रीत है सच्ची,

बिन स्वार्थ तुम रिश्ता निभाती,

ठहरे जहाँ ना कोई अपना,

तुम रहती हो वहाँ,

जो तुझसे मुझे मिलता है मैया,

प्यार मिलेगा कहाँ

साथ हमारा, छूटे कभी ना,

छूटे चाहे जहाँ,

जो तुझसे मुझे, मिलता है मैया,

प्यार मिलेगा कहाँ।

जब भी मेरा दिल तन्हाई में,

शेरावाली घबराता है,

कदम हमारा बढ़ के मैया,

तेरी चौखट पे आता है,

राहत मिलती दिल को मेरे,

मिलता चैन यहाँ,

जो तुझसे मुझे मिलता है मैया,

प्यार मिलेगा कहाँ,

साथ हमारा, छूटे कभी ना,

छूटे चाहे जहाँ,

जो तुझसे मुझे, मिलता है मैया,

प्यार मिलेगा कहाँ।

बनके हमेशा रहना मेरे तुम,

जब तक मेरी सांस चलेगी,

रखना लगाए प्यार से यूँ ही,

कुंदन को तुम अपने गले से,

भूल से भी हो जाए गलती,

करना मुझको क्षमा,

जो तुझसे मुझे मिलता है दाती,

प्यार मिलेगा कहाँ

साथ हमारा, छूटे कभी ना,

छूटे चाहे जहाँ,

जो तुझसे मुझे, मिलता है मैया,

प्यार मिलेगा कहाँ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।