महाकाली का दीवाना

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

दीवाना मैं दीवाना महाकाली का मैं दीवाना,

घाट घाट में तेरा बसेरा भक्तों को माँ तारी,

दीवाना काली का दीवाना,

दीवाना मैं दीवाना।।

दर दर की क्यों ठोकर खाऊं दर दर की क्यों,

दर दर की क्यों ठोकर खाऊं, माई ने हाथ संभाला,

दीवाना काली का दीवाना,

दीवाना मैं दीवाना।।

काली तेरा रूप भयंकर काली तेरा,

काली तेरा रूप भयंकर, हाथ खडग है धारी,

दीवाना काली का दीवाना,

दीवाना मैं दीवाना।।

अंग अंग में तू बिराजे अंग अंग में,

अंग अंग में तू बिराजे, लप लप जीभ निकाली,

दीवाना काली का दीवाना,

दीवाना मैं दीवाना।।

दीवाना मैं दीवाना महाकाली का मैं दीवाना,

घाट घाट में तेरा बसेरा भक्तों को माँ तारी,

दीवाना काली का दीवाना,

दीवाना मैं दीवाना........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।