तू ही है दुर्गा तू ही काली

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तू ही है दुर्गा तू ही काली,

तू ही है मैया शेरावाली,

तेरी नगरिया महिमामयी,

माँ तेरी लीला महिमामयी,

तू ही है दुर्गा तू ही काली,

तू ही है मैया शेरावाली,

तेरी नगरिया महिमामयी,

माँ तेरी लीला महिमामयी॥

मैया ओ मेरी मैया,

ओ मैया ओ मेरी मैया।

भक्तों की रक्षा के लिए मैया,

होती सवार सिंह पे है मैया,

खेटक पाश धनुष मुसल,

त्रिशूल तोमर परशु औहल,

लपकर ऐठो मासान,

शत्रु भागे ले प्राण,

देव पाते है दान,

भक्त पाये वरदान,

शेर दहाड़े मैया बलशाली,

तू ही है मैया शेरावाली,

तू ही है दुर्गा तू ही काली,

तू ही है मैया शेरावाली,

तेरी नगरिया महिमामयी,

माँ तेरी लीला महिमामयी॥

जय जगदम्बे,

जय माँ शेरावाली,

जय माँ मेहरवाली।

दसो दिशाओं में तेरी जय है,

वेद पुराणों में तेरी जय है,

बनके माहेश्वरी करे रक्षा,

भक्तों की पूरी करे इच्छा,

सबसे अलग तेरी शान,

मेरी मैया है महान,

गाये वेद गुणगान,

करे मुनिजन पखान,

होती सहाई मैया खप्परवाली,

तू ही है मैया शेरावाली,

तू ही है दुर्गा तू ही काली,

तू ही है मैया शेरावाली,

तेरी नगरिया महिमामयी,

माँ तेरी लीला महिमामयी,

तू ही है दुर्गा तू ही काली,

तू ही है मैया शेरावाली,

तेरी नगरिया महिमामयी,

माँ तेरी लीला महिमामयी॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।