जंगल में मंगल कर गई रे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जंगल में मंगल कर गई रे मेरी शेरोवाली मईया,

शेरोवाली मईया मेरी शेरोवाली मईया मेरी,

जंगल में मंगल कर गई रे मेरी शेरोवाली मईया॥

हो मेरी शेरोवाली मईया।

मईया के द्वार एक अँधा पुकारे,

मईया ओ मईया वो कहके पुकारे,

अंधे को आंखे दे गयी रे मेरी शेरोवाली मईया,

जंगल में मंगल कर गई रे मेरी शेरावाली मईया,

ओ मेरी शेरोवाली मईया।

मईया के द्वारे एक निर्धन पुकारे,

मईया ओ मईया वो कहके पुकारे,

निर्धन को माया दे गयी रे मेरी शेरोवाली मईया,

जंगल में मंगल कर गई रे मेरी शेरावाली मईया,

हो मेरी शेरोवाली मईया।

मईया के द्वारे एक कोढ़ी पुकारे,

मईया ओ मईया वो कहके पुकारे,

कोढ़ी को काया दे गयी रे मेरी शेरोवाली मईया,

जंगल में मंगल कर गई रे मेरी शेरावाली मईया,

हो मेरी शेरोवाली मईया।

मईया के द्वारे एक बांझन पुकारे,

मईया ओ मईया वो कहके पुकारे

बांझन को बेटा दे गयी रे मेरी शेरोवाली मई,

जंगल में मंगल कर गई रे मेरी शेरावाली मईया,

हो मेरी शेरोवाली मईया।

मईया के द्वारे एक कन्या पुकारे,

मईया ओ मईया वो कहके पुकारे,

कन्या को घर वर दे गयी रे मेरी शेरोवाली मईया,

जंगल में मंगल कर गई रे मेरी शेरावाली मईया,

हो मेरी शेरोवाली मईया।

मईया के द्वारे सारी सगंत पुकारे,

मईया ओ मईया वो कहके पुकारे,

संगत को दर्शन दे गयी रे मेरी शेरोवाली मईया,

जंगल में मंगल कर गई रे मेरी शेरावाली मईया,

हो मेरी शेरोवाली मईया।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।