शैरांवाली माँ दा प्यार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

( मूल्ल ना कोई लगे, नी तू दर जाके वेखले,

भगता दे नाल आके मत्था जरा टेक ले। )

शेरावाली माँ दा प्यार, ज्योतावाली माँ दा प्यार....-2

ना सोना ना चांदी मंगदे,

ना हीरे ते मोती मंगदे

असी ता मंगदे, प्यार मंगदे

शेरावाली माँ दा प्यार, ज्योतावाली माँ दा प्यार......

हर वेले मां रहमता वंडदी,

चरणी लाके दुखड़े हर दी,

सच्ची श्रद्धा नाल जो आवे,

जय मां करदा ओ ही गावे,

शेरावाली माँ दा प्यार, ज्योतावाली माँ दा प्यार......

शर्मा सुनील मां लाल है तेरे,

खुशियां वंडदी कट दी हनेरे,

शर्मा सुनील मां लाल है तेरे,

जस्सू भी मां ये ही गाउँदा,

शेरावाली माँ दा प्यार, ज्योतावाली माँ दा प्यार......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।