आया बुलावा भवन से मैं रह ना पाई

लखबीर सिंह लक्खा
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरे दर्श की धुन में माता,

हम है हुए मतवाले,

रोक सकी ना आँधिया हमको,

ना ही ये बादल काले,

चढ़ चढ़ कठिन चढ़ाइयां,

बेशक पाँव में पड़ गए छाले,

फिर भी तेरे दर आ पहुंचे,

हम है किस्मत वाले।

आया बुलावा भवन से, मैं रह ना पाई,

अपने पति संग चढ़ के चढ़ाई, नंगे पाँव आई,

लाल चुनरी चढाऊं, जय हो माँ,

तेरी ज्योत जगाऊं, जय हो माँ,

बस इतना वर चाहूँ,

मैं बस इतना वर पाऊँ,

दर्शन को हर साल,

सदा सुहागन ही आऊँ माँ,

जय हो भवानी,

जय जय महा रानी।।

हे अखंड ज्योत वाली माता,

मेरा भी अखंड सुहाग रहे,

सदा खनके चूड़ियाँ मेरे हाथों में,

सिंदूर भरी ये मेरी माँग रहे,

महके परिवार, जय हो माँ,

रहे खिली बहार, जय हो माँ,

फूलों की तरह मुस्काऊँ,

फूलों की तरह मुस्काऊँ,

दर्शन को हर साल,

सदा सुहागन ही आऊँ,

जय हो भवानी,

जय जय महा रानी।।

मुझको वर दो मेरा स्वामी,

तेरी भक्ति में मगन रहे,

जब तक यह जीवन रहे सरल,

‘लक्खा’ को तेरी लगन रहे,

तेरा सच्चा दरबार, जय हो माँ,

तेरी महिमा अपार, जय हो माँ,

चरणों में शीश नवाऊं,

चरणों में शीश नवाऊं,

दर्शन को हर साल,

सदा सुहागन ही आऊँ,

जय हो भवानी,

जय जय महा रानी...........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।