शेरावाली कब आओगी मेरे अंगना

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

शेरावाली कब आओगी,

मेरे अंगना,

मेहरावाली कब आओगी,

मेरे अंगना।।

चुनरी तो मैं ले आई हूँ,

चुनरी तो मैं ले आई हूँ,

चोला ले आएगा, मेरा बालमा,

शेरावाली कब आओगी,

मेरे अंगना,

मेहरावाली कब आओगी,

मेरे अंगना।।

बिंदिया तो मैं ले आई हूँ,

बिंदिया तो मैं ले आई हूँ,

टीका ले आएगा, मेरा बालमा,

शेरावाली कब आओगी,

मेरे अंगना,

ज्योतावाली कब आओगी,

मेरे अंगना।।

माला तो मैं ले आई हूँ,

माला तो मैं ले आई हूँ,

हरवा ले आएगा, मेरा बालमा,

शेरावाली कब आओगी,

मेरे अंगना,

मेहरावाली कब आओगी,

मेरे अंगना।।

मेहंदी तो मैं ले आई हूँ,

मेहंदी तो मैं ले आई हूँ,

चुड़ा ले आएगा, मेरा बालमा,

शेरावाली कब आओगी,

मेरे अंगना,

लाटांवाली कब आओगी,

मेरे अंगना।।

साड़ी तो मैं ले आई हूँ,

साड़ी तो मैं ले आई हूँ,

लहंगा ले आएगा, मेरा बालमा,

शेरावाली कब आओगी,

मेरे अंगना,

लाटांवाली कब आओगी,

मेरे अंगना,

मेहरावाली कब आओगी,

मेरे अंगना,

ज्योतावाली कब आओगी,

मेरे अंगना,

शेरावाली कब आओगी,

मेरे अंगना.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।