माँ के दर जाना है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

नवरात्रे है जब आते,

सब मैया के गुण गाते,

नवरात्रे है जब आते,

सब मैया के गुण गाते,

हँसते गाते ढोल बजाते,

सब है ये ही कहते,

माँ के दर जाना है जी माँ के दर जाना है,

माँ के दर जाना है जी माँ के दर जाना है।

नवरात्रे है जब आते,

पर्वत पर मेले लगते,

नवरात्रे है जब आते,

पर्वत पर मेले लगते,

माँ के जयकारे बोल के प्यारे,

सब है ये ही कहते,

माँ के दर जाना है जी माँ के दर जाना है,

माँ के दर जाना है जी माँ के दर जाना है।

खो कर के मांगी धूनी,

कर जाप उसी का गण में,

हर भक्त यही है कहता,

मेरी माँ बसी कण कण में,

जय माता दी, जय माता दी,

जो सर्व कलाओं में है,

जो कल्प लताओं में है,

जब अंतर मन से देखे वो दसो दिशाओं में है,

बोल के उसकी जय,

सब है ये ही कहते,

माँ के दर जाना है जी माँ के दर जाना है,

माँ के दर जाना है जी माँ के दर जाना है,

नवरात्रे है जब आते,

सब मैया के गुण गाते.......

जब करेंगे माँ का दर्शन,

हो जायेगा शीतल तन मन,

सब सिद्ध मनोरथ होंगे,

ना दुःख के रहेंगे बंधन,

जय माता दी. जय माता दी,

हो जायेगा हर सुख हासिल,

कदमो में होगी मंज़िल,

आसान करेगी पल में माँ सौ जन्मो की मुश्किल,

बोल के उसकी जय इसीलिए सभी कहते,

माँ के दर जाना है जी माँ के दर जाना है,

माँ के दर जाना है जी माँ के दर जाना है,

नवरात्रे है जब आते,

पर्वत पर मेले लगते,

माँ के जयकारे बोल के प्यारे,

सब है ये ही कहते,

माँ के दर जाना है जी माँ के दर जाना है,

माँ के दर जाना है जी माँ के दर जाना है........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।