पर्वत से मैया आई री मंदिर को छोड़ के

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

पर्वत से मैया आई री मंदिर को छोड़के,

पर्वत से मैया आई री मंदिर को छोड़के ॥

या मंदिर में ब्रह्मा जी आए,

ब्रह्माणी संग में लाए री जयकारा बोल के,

पर्वत से मैया आई री मंदिर को छोड़के,

मेरे अंगना मैया आई री मंदिर को छोड़ के॥

या मंदिर में विष्णु जी आए,

लक्ष्मी जी संग में लाए री जयकारा बोल के,

पर्वत से मैया आई री मंदिर को छोड़के,

मेरे अंगना मैया आई री मंदिर को छोड़ के॥

या मंदिर में भोले जी आए,

गौरा को संग मे लाए री जयकारा बोल के,

पर्वत से मैया आई री मंदिर को छोड़के,

मेरे अंगना मैया आई री मंदिर को छोड़ के॥

या मंदिर में रामा जी आए,

सीता को संग में लाए री जयकारा बोल के,

पर्वत से मैया आई री मंदिर को छोड़के,

मेरे अंगना मैया आई री मंदिर को छोड़ के॥

या मंदिर में कान्हा जी आए,

राधा को संग में लाए री जयकारा बोल के,

पर्वत से मैया आई री मंदिर को छोड़के,

मेरे अंगना मैया आई री मंदिर को छोड़ के॥

या मंदिर में ऋषि मुनि आए,

भक्तों को संग में लाए री जयकारा बोल के,

पर्वत से मैया आई री मंदिर को छोड़के,

मेरे अंगना मैया आई री मंदिर को छोड़ के॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।