आजा आजा मां शेरावाली आजा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तरसे ये नैना मेरे बरसेंगे नैना,

खोल मात दरवाजा आजा आजा मां शेरावाली आजा॥

किसने तो मैया तेरा भवन बनाया,

कौन गली में मैया चल कर आया,

कौन देश का राजा आजा आजा मां शेरावाली आजा॥

पांचो पांचो पांडव मैया भवन बनाया,

तेरी गली में मैया चल कर आया,

हस्तिनापुर का राजा आजा आजा मां शेरावाली आजा॥

किसने तो मैया तेरा छत्र चढ़ाया,

कौन गली में मैया चल कर आया,

कौन देश का राजा आजा आजा मां शेरावाली आजा॥

अकबर ने मैया छत्र चढ़ाया,

नंगे नंगे पैरों मैया चल कर आया,

उमड़ देश का राजा आजा आजा मां शेरावाली आजा॥

किसने तो मैया अपना शीश चढ़ाया,

कौन गली में मैया चल कर आया,

कौन देश का राजा आजा आजा मां शेरावाली आजा॥

ध्यानु भगत ने मैया शीश चढ़ाया,

वो ही भगत तेरे दर पे आया,

भक्ति का वो राजा आजा आजा मां शेरावाली आजा॥

तरसे ये नैना मेरे बरसेंगे नैना,

खोल मात दरवाजा आजा आजा मां शेरावाली आजा........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।