जय अजमल लाला

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन विविध भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जय अजमल लाला,प्रभू जय अजमल लाला।

भक्त काज कलयुग में,लीन्हो अवतारा॥

ॐ जय अजमल लाला

अश्वन की असवारी सोवे, केशरिया जामा।

शीश तुर्रो हद सोवे, हाथ में लिये भाला॥

ॐ जय अजमल लाला

डूबत जहाज तैराई, भैरव देत्य मारा।

कृष्ण कला भय भंजन, राम रुणीचे वाला।

ॐ जय अजमल लाला

अन्धन को प्रभु नेत्र देते हैं, कोढ़न को काया।

बांझन पुत्र खिलावे, निर्धन को माया॥

ॐ जय अजमल लाला

नाथ द्वारका धाम से चलकर, धोरा में आया।

चार कूंट चऊदीश में, नेजा फहराया॥

ॐ जय अजमल लाला

जब जब भीड़ पड़ी भक्ता पर, दौड़ दौड़ आया।

जहर भरे जीवन में, अमृत बरसाया॥

ॐ जय अजमल लाला

आरती रामदेव जी की, जो कोई नर गावे।

कटे पाप जन जन का, विपदा मिट जावे॥

ॐ जय अजमल लाला

ॐ जय अजमल लाला, प्रभु जय अजमल लाला।

बाबा राम रूणीचे वाला, बाबा लीले घोड़े वाला, बाबा मेंणादे का लाला, बाबा धोली ध्वजा वाला,

भक्त काज कलयुग में, लीन्हो अवतारा॥

ॐ जय अजमल लाला

बस यूं ही आपका अपना - Chandu Singh Gaur, बीकानेर

Phone no.8608095434

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।