जब जब मन मेरा घबराये

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जब जब मन मेरा घबराये,

और तकलीफ सताती है,

मेरे सिरहाने खड़ी है मईया,

सिर पे हाथ फिराती है।।

लोग ये समझे मैं हूँ अकेली,

लेकिन साथ में मईया है,

लोग ये समझे डूब रही,

पर चल रही मेरी नईया है,

जब जब तूफान आते है,

ये खुद पतवार चलाती है,

मेरे सिरहाने खड़ी है मईया,

सिर पे हाथ फिराती है।।

जिसके आंसू कोई ना पोछे,

जिसको ना कोई प्यार करे,

जिसके साथ ये दुनिया वाले,

मतलब का वय्वहार करे,

दुनिया जिसे ठुकराती उसको,

मईया गले लगाती है,

मेरे सिरहाने खड़ी है मईया,

सिर पे हाथ फिराती है।।

प्रीत की डोर बंधी मईया से,

जैसे दीपक बाती है,

कदम कदम पर रक्षा करती,

ये सुख दुःख की साथी है,

कोई जब रस्ता ना सूझे,

प्रेम का दीप जलाती है,

मेरे सिरहाने खड़ी है मईया,

सिर पे हाथ फिराती है।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।