चलो चलो माता वैष्णो के द्वार

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चलो चलो चलो माता वैष्णो के द्वार,

चलो चलो चलो गुफा वाली माँ के द्वार,

चलो चलो चलो माता वैष्णो के द्वार,

चलो चलो चलो माता वैष्णो के द्वार,

सारे बोलो भई जय जय माता दी जय माता दी,

संगत बोले भई जय माता दी जय माता दी,

छोटे बोले भई जय माता दी जय माता दी,

बड़े बोले भई जय माता दी जय माता दी,

भाई भी बोले जय माता दी,

बहन भी बोले जय माता दी,

अंकल बोले जय माता दी,

आंटी बोले जय माता दी,

दीन दुखी बेसहारे लाखो किस्मत के मारे,

दीन दुखी बेसहारे लाखो किस्मत के मारे,

पूजे देवता भी सारे तेरी चरण पादुका,

तेरी चरणपादुका जी तेरी चरणपादुका,

तेरी चरणपादुका जी तेरी चरणपादुका,

इसकी धूल महादाती जिसके माथे लग जाती,

इसकी धूल महादाती जिसके माथे लग जाती,

राजा रंक को बनाती तेरी चरणपादुका,

राजा रंक को बनाती तेरी चरणपादुका,

तेरी चरणपादुका जी तेरी चरणपादुका,

तेरी चरणपादुका जी तेरी चरणपादुका,

सारे बोलो भई जय जय माता दी जय माता दी,

मिलके बोलो भई जय माता दी जय माता दी,

सारे बोले जय जय माता दी जय माता दी,

खोटे बोलो भई जय माता दी जय माता दी।

बड़े भाग्यशाली है जो माथा यहाँ टेकते,

वो ही तेरी रेहमतो का जादू हे माँ देखते,

बड़े भाग्यशाली है जो माथा यहाँ टेकते,

वो ही तेरी रेहमतो का जादू हे माँ देखते,

सारे जग से न्यारी मैया भवभयहारी,

पारस मणियो सी प्यारी तेरी चरणपादुका,

तेरी चरणपादुका जी तेरी चरणपादुका,

जय माता दी बोल नैया तर जायेगी,

डोली तेरी सुख रत्नो से भर जायेगी,

माँ के दुवारे जाना हमें चिट्ठी आयी है,

चलो बुलावा आया है माता ने बुलाया है।

सपने साकार यहाँ हो जाते पल में,

बेख़ौफ़ चलती है नैया भवजल में,

सपने साकार यहाँ हो जाते पल में,

बेख़ौफ़ चलती है नैया भवजल में,

लीला बड़ी ही दिखाए सूखे वृक्षों को खिलाये,

फूल कांटो को बनाये, तेरी चरणपादुका,

तेरी चरणपादुका जी तेरी चरणपादुका,

पोड़ी पोड़ी चढ़ता जा ओ भक्ता पोड़ी पोड़ी चढ़ता जा,

जय माता दी करता जा,

जय माता दी करता जा,

जयकारा शेरावाली का,

बोल साचे दरबार की जय,

जयकारा वैष्णवाणी का,

बोल साचे दरबार की जय.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।