है गर तू मुसीबत में

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

है गर तू मुसीबत में, मेरी मैया के द्वारे आ,

है गर तू मुसीबत में, मेरी मैया के द्वारे आ,

हर लेंगी हर मुश्किल, श्रद्धा से तू शीश झुका,

हर लेंगी हर मुश्किल, श्रद्धा से तू शीश झुका॥

मईहर में बिराजी माँ, कर दर्शन यहाँ एक बार,

मईहर में बिराजी माँ, कर दर्शन यहाँ एक बार,

चार धामाँ तेरे घर में, भर देंगी सुखों की खान,

है गर तू मुसीबत में, मेरी मैया के द्वारे आ,

है गर तू मुसीबत में, मेरी मैया के द्वारे आ॥

दतिया में बिराजी माँ, आ यहाँ कर ले तू दीदार,

दतिया में बिराजी माँ, आ यहाँ कर ले तू दीदार,

तेरे चमके सदा दिन रात, माँ पीतांबरा है नाम,

है गर तू मुसीबत में, मेरी मैया के द्वारे आ,

है गर तू मुसीबत में, मेरी मैया के द्वारे आ॥

देवास में आ एक बार, आएगा सदा हर बार,

देवास में आ एक बार, आएगा सदा हर बार,

चामुण्डा और माँ दुलजा, हैं फिर खुशियां अपार,

है गर तू मुसीबत में, मेरी मैया के द्वारे आ,

है गर तू मुसीबत में, मेरी मैया के द्वारे आ॥

संकंपुर में बैठी माँ, बिजयासन है इनका नाम,

पर्वत पे बिराजी माँ, पूरी करती हर इक कामना,

है गर तू मुसीबत में, मेरी मैया के द्वारे आ,

है गर तू मुसीबत में, मेरी मैया के द्वारे आ॥

नीमच में बिराजी माँ, भागवा है इनका नाम,

रोगी को निरोगी करे, ऐसा जादू करे मेरी माँ,

है गर तू मुसीबत में, मेरी मैया के द्वारे आ,

है गर तू मुसीबत में, मेरी मैया के द्वारे आ॥

शीतला माँ का जो है धाम, ग्वालियर है वहां का नाम,

जाते है वहां भक्तां, मन में लेके मुरादे तमाम,

है गर तू मुसीबत में, मेरी मैया के द्वारे आ,

है गर तू मुसीबत में, मेरी मैया के द्वारे आ॥

हर सिद्धि मेरी मईया, करदो पूरी हमारी मुराद,

बैठी जो बिराजत, उस धरा का है उज्जैन नाम,

है गर तू मुसीबत में, मेरी मैया के द्वारे आ,

है गर तू मुसीबत में, मेरी मैया के द्वारे आ,

हर लेंगी हर मुश्किल, श्रद्धा से तू शीश झुका,

हर लेंगी हर मुश्किल, श्रद्धा से तू शीश झुका,

है गर तू मुसीबत में, मेरी मैया के द्वारे आ,

हर लेंगी हर मुश्किल, श्रद्धा से तू शीश झुका।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।