पर्बत की चोटी पे

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

पर्बत की चोटी पे,

पर्बत की चोटी पे,

मंदिर माँ बड़ी दूर,

पर्बत की चोटी पे,

मंदिर माँ बड़ी दूर,

पाँव में पड़ गए छाले मेरे,

थक कर हो गयी चूर,

पर्बत की चोटी पे,

मंदिर माँ बड़ी दूर,

बांह पकड़ के ले जा मुझको,

विनती कर मंज़ूर,

पर्बत की चोटी पे,

मंदिर माँ बड़ी दूर.......

तुम महादेवी महाबलशाली,

हम मानव कमज़ोर,

हम मानव कमज़ोर,

रस्ते में ही टूट ना जाये,

इन साँसों की डोर,

इन साँसों की डोर,

तुमसे दया की भिक्षा मांगू,

होकर मैं मजबूर,

पर्बत की चोटी पे,

मंदिर माँ बड़ी दूर,

पाँव में पड़ गए छाले मेरे,

थक कर हो गयी चूर,

पर्बत की चोटी पे,

मंदिर माँ बड़ी दूर.....

तुमको पता है इस दुखिया के,

कैसे है हालात हो,

कैसे है हालात,

रूठा हुआ है सुख का उजाला,

छायी दुःख की रात ओ,

छायी दुःख की रात,

भूले से अगर हो गया हो तो,

करदे माफ़ कसूर,

पर्बत की चोटी पे,

पर्बत की चोटी पे,

मंदिर माँ बड़ी दूर,

पाँव में पड़ गए छाले मेरे,

थक कर हो गयी चूर,

पर्बत की चोटी पे,

मंदिर माँ बड़ी दूर.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।