तेरे दर पे खुलते नसीबों के ताले

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरे दर पे खुलते नसीबों के ताले,

तेरे दर पे खुलते नसीबों के ताले,

तेरी ज्योत करती घरों में उजाले,

तेरे रंग देखे हैं हमने निराले,

उड़ा देती ग़म के बादल तू काले,

तेरे दरबार की हम, रहें हैं महिमा अब गा भवानी माता,

दया का हम सभी पर अनोखा रस दे बरसा भवानी माता,

भवानी माता, भवानी माता, भवानी माता.....

तेरे दरबार की हम रहें हैं महिमा अब गा भवानी माता।

बड़ी महिमा माँ माँ

सुनी तेरी माँ माँ माँ

यहां झुकता माँ माँ

सारा जहां.......

अंबे महा माया शरण जो भी आया,

उसे पार भव से माँ तूने लगाया,

हमें भी भरोसा तुम्ही पे है मैया,

कभी तो तरेगी हमारी भी नैया,

कभी तो तरेगी हमारी भी नैया,

हमारी भी नैया....

तेरे दरबार की हम रहें हैं महिमा अब गा भवानी माता,

भवानी माता, भवानी माता, भवानी माता.....

तेरे दरबार की हम रहें हैं महिमा अब गा भवानी माता।

जय हो

तेरा भवानी माँ दिल है विशाल,

करती करिश्में तू है बेमिसाल,

उपकार जग में तेरे बेहिसाब,

रहमतों का तेरी है ढंग लाजवाब,

सुनो विनती माँ माँ,

कभी पकड़ो बांह बांह,

कोई दानी तुझ जैसा और कहाँ......

कला कोई माता अब तू दिखा दे,

ये गमगीन चेहरे ज़रा सी हँसा दे,

खजानों में तेरे कमी तो नहीं माँ,

ये संकट की आंधी थमी क्यूँ नहीं माँ, थमी क्यूँ नहीं माँ,

ये आँखों से आंसू बहते जो माता

कथा दर्दे दिल की कहते वो माता,

कथा दर्दे दिल की कहते वो माता,

कहते वो माता.....

हमें भी प्यार देदे सुखी संसार देदे,

भवानी माता, भवानी माता, भवानी माता.....

तेरे दर पे खुलते नसीबों के ताले,

तेरी ज्योत करती घरों में उजाले,

तेरे रंग देखे हैं हमने निराले,

उड़ा देते ग़म के बादल तू काले,

तेरे दरबार की हम रहें हैं महिमा अब गा भवानी माता,

भवानी माता, भवानी माता, भवानी माता..........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।