मैया जी का मुखड़ा देख के

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ जय जय माँ, माँ, जय जय माँ,

कलेजा होता ठंडा,

मैया जी का मुखड़ा देख के,

कलेजा होता ठंडा,

मैया जी का मुखड़ा देख के,

मैया जी का मुखड़ा देख के,

कलेजा होता ठंडा,

मैया जी का मुखड़ा देख के॥

पाप ताप संताप मिटता,

होता आनंद तन मन में,

दुखों का अंधकार छँटता,

होता उजाला जीवन में,

मैं नहा लेता गंगा,

मैया जी का मुखड़ा देख के,

कलेजा होता ठंडा,

मैया जी का मुखड़ा देख के॥

भूल जाता मैं दुनियादारी,

आ ममता की छाया में,

काम क्रोध मद लोभ छूटता,

भूलता अपना पराया मैं,

मन हो जाता है चंगा,

मैया जी का मुखड़ा देख के,

कलेजा होता ठंडा,

मैया जी का मुखड़ा देख के॥

माँग कर ले जाता सूरज,

रौशनी जग सारे की,

मैया के मुखड़े से चमक है,

अंबर के हर तारे की,

है करता चांदनी चंदा,

मैया जी का मुखड़ा देख के,

कलेजा होता ठंडा,

मैया जी का मुखड़ा देख के॥

तीन लोक का सुख मिलता है,

दर्शन तेरे करके माँ,

हो जाते हैं निहाल बच्चे,

ममता से झोली भरके माँ,

“सागर” छोड़ा गोरख धंधा,

मैया जी का मुखड़ा देख के,

कलेजा होता ठंडा,

मैया जी का मुखड़ा देख के.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।