जगमग ज्योत जगे मईया के दरबार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जगमग ज्योत जगे मईया के दरबार,

जो भी आये माँ के दर पे, हो जाए मालामाल,

जगमग ज्योत जगे.... जय हो

जगमग ज्योत जगे मईया के दरबार।।

जय माता दी, जय माता दी, जय माता दी.....

मन की श्रद्धा से भावो सेम माँ की चौंकी रचाई,

रंग बिरंगे घोटो वाली चुनरी माँ को ओढ़ाई......-2

माँ रहमत की बरसी किरपा, हुआ माँ दीदार,

जगमग ज्योत जगे.... जय हो

जगमग ज्योत जगे मईया के दरबार।।

जय माता दी, जय माता दी, जय माता दी.....

ऊँचा भवन रंगीला माँ का, भगतो के मन भाये,

चढ़ के चड़ाईआं भवन मईया के, भगतो की टोली आये......-2

खोल भंडारे बैठी मईया, दे सबको वरदान,

जगमग ज्योत जगे.... जय हो

जगमग ज्योत जगे मईया के दरबार।।

जय माता दी, जय माता दी, जय माता दी.....

अपने लाडले भगतो को देती सदा सहारा,

माँ ममता की गंगा में मिले हर भटके को किनारा......-2

कोई स्वाली जाए ना खाली, आये जो माँ दरबार,

जगमग ज्योत जगे.... जय हो

जगमग ज्योत जगे मईया के दरबार।।

जय माता दी, जय माता दी, जय माता दी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।