अरी री मैं तो ओढ़ चुनरिया जाउंगी मेले में

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अरी री मैं तो ओढ़ चुनरिया जाउंगी मेले में,

अरी री मेरा मन ना लगे घर के झमेले में,

अरी री मैं तो ओढ़ चुनरिया जाउंगी मेले में।

नथनी पहनी झुमका पहना, पहना नौ लखा हार,

हाथ में कंगन पांच पायलिया, कर सोलह श्रिंगार,

मगन भई छम छम नाचू, मईया के मेले में,

अरी री मैं तो ओढ़ चुनरिया जाउंगी मेले में ॥

ध्वजा नारियल पान सुपारी रोली और कलावा,

लाल चुनरिया चली सजा के माँ ने आज बुलाया,

मगन भई आज दीवानी मईया के मेले में,

अरी री मैं तो ओढ़ चुनरिया जाउंगी मेले में ॥

तेरे भवन पे झंडे झूले छाई अजब बाहर,

फुल चन्द तेरी महिमा गावै हो रही जय जयकार,

सखी री मैं तू छम छम नाचू मईया के मेले में,

अरी री मैं तो ओढ़ चुनरिया जाउंगी मेले में,

अरी री मेरा मन ना लगे घर के झमेले में,

अरी री मैं तो ओढ़ चुनरिया जाउंगी मेले में........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।