माँ ने दर पे बुलाया मुलाकात हो गई

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आ गए देखो नवरातें ओये क्या बात हो गई,

माँ ने दर पे बुलाया मुलाकात हो गई,

होते घर घर में जगराते ओये क्या बात हो गई,

माँ ने दर पे बुलाया मुलाकात हो गई,

माँ ने दर पे बुलाया मुलाक़ात हो गई।

मंदिर साजे घंटे हैं बाजे खुशियां में दुनिया नाचे,

माँ के दर्शन आँखें ये तरसती थी,

सावन भादो के जैसे ये बरसती थी,

थम गए आँखों के आंसू ओये क्या बात हो गई,

माँ ने दर पे बुलाया मुलाकात हो गई,

माँ ने दर पे बुलाया मुलाक़ात हो गई।

चुनरी छुड़ाने भोग लगाने आये हैं माँ को मनाने,

जो भी दर पे आया है उसका भाग्य जगा,

देखो मैया के दर पे भारी मेला लगा,

भर गई झोलियाँ खाली ओये क्या बात हो गई,

माँ ने दर पे बुलाया मुलाकात हो गई,

माँ ने दर पे बुलाया मुलाक़ात हो गई।

कहता चोखानी अम्बे भवानी मैया बड़ी वरदानी,

जिनसे मैया को श्रद्धा से पुकारा है,

उसकी बिगड़ी को मैया ने संवारा है,

मिल गया दर्शन माँ का ओये क्या बात हो गई,

माँ ने दर पे बुलाया मुलाकात हो गई,

आ गए देखो नवरातें ओये क्या बात हो गई,

होते घर घर में जगराते ओये क्या बात हो गई,

माँ ने दर पे बुलाया मुलाकात हो गई,

माँ ने दर पे बुलाया मुलाक़ात हो गई.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।