जो जय माता की गाता है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जो जय माता की गाता है,

जीवन में बड़ा सुख पाता है ॥

कपड़े में दाग लग गाता है,

वो साबुन से धुल गाता है,

जब कुल में दाग लग गाता है,

उसे कोई छुड़ा नही पाता है,

जो जय माता की गाता है,

जीवन में बड़ा सुख पाता है ॥

जो सिर से साड़ी फिसल गई,

नारी उसे तुरंत सम्भाल रही,

जो नारी धर्म से फिसल गयी,

उसे कोई बचा नही पाता है,

जो जय माता की गाता है,

जीवन में बड़ा सुख पाता है ॥

बेटा जो माँ से रूठ गया,

माँ उसको तुरंत मनाती है,

जो माँ बेटे से रूठ गयी,

उसे कोई मना नही पाता है,

जो जय माता की गाता है,

जीवन में बड़ा सुख पाता है ॥

माली ने बाग लगाया है,

डाली पर फुल खिलाया है,

जो पेड़ से डाली टूट गयी,

उसे कोई लगा नही पाता है,

जो जय माता की गाता है,

जीवन में बड़ा सुख पाता है ॥

सच बोलना यहाँ पर धर्म मेरा,

नेकी पर चलना कर्म मेरा,

जो नेक राह अपनाता है,

वो परम पिता को पाता है,

जो जय माता की गाता है,

जीवन में बड़ा सुख पाता है........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।