सोने की लंका

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

कांधे पे रख के गदा,

चल दिये सीना तान,

माता सिया की खोज में,

चल पड़े वीर हनुमान।

सोने की लंका,

अरे सोने की लंका जला गयी थी,

गये निशाचर भाग,

ऐसी लगायी आग,

रावण का तोड़ा मान,

जय जय महावीर बलवान,

ओ जय जय पवनपुत्र हनुमान,

जय जय महावीर बलवान,

जय जय पवनपुत्र हनुमान।।

अक्षय को तूने मार गिराया, इंद्रजीत बेहद घबराया,

अरे अक्षय को तूने मार गिराया, इंद्रजीत बेहद घबराया,

ब्रह्मा फास सम्मान किया था, दसमुख का हिर्दय दहलाया,

दसमुख का हिरदय दहलाया,

अरे दिन की तूने रात बनायी, अपनी जमाके धार,

लंका बनायी राख,

गंग तेजातु धान, जय जय महावीर हनुमान,

ओ जय जय पवनपुत्र बलवान,

जय जय महावीर बलवान,

जय जय पवनपुत्र हनुमान।

जय हो बालाजी की जय हो,

जय हो बालाजी की जय हो,

जय हो बालाजी की जय हो,

जय हो बाला की जय.....

अजर अमर हो तेरी काया, जान की आशीर्वाद दिया,

अजर अमर हो तेरी काया, जान की आशीर्वाद दिया,

तीन लोक तेरी पूजा होगी, सुन तूने सिंगनाद किया,

सुन तूने सिंगनाद किया....

श्री राम ने भी माना था, हनुमत का एहसान,

पुत्र का दे सम्मान,

तू ज्ञान गुणों की खान, जय जय महावीर हनुमान,

ओ जय जय पवनपुत्र बलवान,

जय जय महावीर बलवान,

जय जय पवनपुत्र हनुमान,

अरे सोने की लंका जला गयी थी,

गये निशाचर भाग,

ऐसी लगायी आग,

रावण का तोड़ा मान,

जय जय महावीर बलवान,

ओ जय जय पवनपुत्र हनुमान,

जय जय महावीर बलवान,

जय जय पवनपुत्र हनुमान........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।