माँ ने बुलाया बेटा नहीं आया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

पहले चिट्ठी भेजी फिर तार भेजा,

माँ ने बुलावा कई बार भेजा,

बेटा नहीं आया.......

पहले चिट्ठी भेजी फिर तार भेजा।

पूजा पाठ में उसका तनिक भी ध्यान ना था,

क्या होती है माता उसको ज्ञान ना था,

वो था बड़ा अभिमानी मुर्ख और अज्ञानी,

दौलत का उसपे था नशा छाया,

बेटा नहीं आया.......

पहले चिट्ठी भेजी फिर तार भेजा।

काली घनेरी दुःख की बधरी छाने लगी,

उसको बुरे दिन वाली आदत आने लगी,

भूल हुई पछताया, दौड़ा दौड़ा आया,

आशीष माँ का तब वो पाया,

बेटा चला आया.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।